गुरु पूर्णिमा पर चातुर्मास और सेलिब्रिटी सिंगार का समीकरण

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(सच्चिदानंद) चातुर्मास का आरंभ व्यास पुर्णिमा पर ही होता रहा है। वास्तव में यह मानसून के आगाज का उत्सव है। यह पर्व बरसात की शुरुआत के साथ ही सूर्य के उत्तर आरोहण के अंतिम का प्रहर का सूचक भी है। संस्कृत साहित्य में प्रकाश की कमी और अंधकार की वृद्धि के बीच संतुलन की प्रक्रिया पर्व को ही चातुर्मास कहा गया है। पुराने समय में यह चार महीने का समय होता था। गुरु-श्ष्यि का यह सहवास काल ज्ञानार्जन का उत्कृष्ट समय माना जाता था। अब यह उपभोग का उपयुक्त काल हो गया है। आरुणि जैसे महान ऋषि का पुरुषार्थ इसी समय दृष्टिगोचर हुआ था। बाजारवाद के आधुनिक काल में नित्यानंद, रामदेव और निर्मल बाबाओं की लीलापुष्टि के दौर में तो यह सर्वोत्कृष्ट काल बनता जा रहा है? भीमानंद की परंपरा इस गुरुपुर्णिमा पर बढ़कर फर्जी डिग्री वाले बलात्कारी बाबा तक पहुंच गयी है। आजकल वही श्रद्धा के केंद्र…

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नेल्सन मंडेला: रंगभेद और नस्लभेद के खिलाफ एक आवाज

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(कौशल किशोर) दुनिया के इतिहास में अहिंसक आंदोलनों का राजनैतिक प्रयोग गांधी और मंडेला जैसे महान विभूतियों की ही देन है। दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ सरसठ सालों की लंबी जंग लड़कर उन्हाने प्रथम अश्वेत राष्ट्रपति का चुनौती भरा कार्यभार संभाला था। सामाजिक न्याय और राजनैतिक संघर्ष की मिसाल कायम करने वाले महानायक के सम्मान में 91 वर्ष पूरा करने पर दुनियाभर में करबी हजारों जगहों पर लोगों ने उत्सव मनाया था। यह परंपरा बदस्तूर कायम होती जा रही है। आज पंचानवे वर्ष का वृद्धावस्था में वह चिकित्सालय में अंतिम सांसें गिन रहे हैं। नेल्सन मंडेला के सम्मान में संयुक्त राष्ट्र संघ ने 2009 में उनके जन्मदिन के अवसर पर ‘मंडेला दिवस मनाने की घोषणा की थी।

मंडेला के महान कार्यों के प्रति सम्मान समाज की उदारता है। करीब एक दशक पूर्व दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद विरोधी अहिंसक क्रांतिकारी के सम्मान में विशाल कार्यक्रमों का सिलसिला महान उद्धेश्यों…

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How Indian Constitution & Democracy were Hijacked?

punarnav bharat

In 1992, then Prime Minister Narasimha Rao and his Finance Minister Manmohan Singh kept a framework before the country – that they wanted to bring a new stream of prosperity and development in the country and wanted to put an end to the Inspector Raj. In fact, the control of the Government had gradually increased and people had got fed up of the Inspector Raj. In this period, instead of the public welfare state outlined by the Constitution, the then Prime Minister and his Finance Minister envisioned a market based state and from 1992 till today the character of the Government has completely changed.

Nobody questioned how, without taking the people into confidence, and without bring a Constitutional Amendment, Government was changed from a public welfare state Government to a market-based and profit-based Government. In other words, the country’s Constitution had been changed without taking the opinion or views…

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Former GM of Samaja tells of a secret money transaction between Orissa CM Naveen Patnaik and Manubhai Patel of SoPS: Investigation essential

Orissa Matters

Subhas Chandra Pattanayak

Former General Manager of the Samaja, retired IAS officer Dandanirodh Mishra, has kept on records a secret money transaction between Orissa Chief Minister Naveen Patnaik and the then Chief of Servants of the People Society Manubhai Patel, which could have been captured by secret camera had he not timely alerted the Chief Minister over phone.

In a letter to Manubhai Patel, bearing the Samaja No.253/GM/2007 dated 25.07.2007, Mishra has written, “You are aware that I had saved you from embarrassment, humiliation and ignominy by requesting the Chief Minister to have a telephonic discussion with you when you were rushing to Puri on 15th November, 2006 to collect a sum of Rs.50.00 lakhs”.

Mishra has mentioned of a “scheduled programme” with the CM for receiving the money in person. But as, instead of meeting the CM as per the “scheduled programme”, he was “rushing to Puri” in response…

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मोदी का महिमा मंडन बनाम मीडिया प्रबन्धन और लोबीइंग की बाजीगरी

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शेष नारायण सिंह

जून के तीसरे हफ्ते में उत्तराखण्ड की भयावह त्रासदीकी खबर के आने के साथ इंसानियत दहल उठी थी, जिसने जहाँ सुना, वहीं सन्नाटे में आ गया। चारधाम यात्रा का सीज़न था तो पूरे भारत से लोग उत्तराखण्डके गढ़वाल इलाके में पहुँचे हुये थे। जब भारी बारिश की खबर आयी तो तबाही इस हिमालयी इलाके के हर कण में आ चुकी थी। तीर्थयात्रा पर आये लोग और पर्यटक सभी मुसीबत से आमने सामने थे। भारतीय आपदा प्रबन्धन तन्त्र हरकत में आ गया था, सेना बुला ली गयी थी, भारत तिब्बत सीमा पुलिसऔर आपदा प्रबन्ध के लिये तैयार की गयी फोर्स सब जुटे हुये थे। उत्तराखण्ड की सरकार समेत सभी सरकारें जिनके लोग यहाँ फंसे थे, चिन्तित थीं। बचाव और राहत का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा था। राज्य सरकारें भी सक्रिय हो गयी थीं। जिन यात्रियों को सेना के लोग बचाकर देहरादून तक ला रहे थे उनको उनके…

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बौद्ध मंदिर में हिंसा का अर्थ

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(कौशल किशोर) अभी हिमालय में कृत्रिम कोप की तबाही का ब्यौरा आया भी नहीं कि बौधमंदिर में ‘सीरियल-ब्लास्ट’ चैंकाने वाली बात है। इस हादसे का सूत्र ब्रह्मदेश के क्षेत्रिय तनावों में देखा जा रहा है। म्यानामार के अराकान क्षेत्र में रोहिंग्या मुसलमानों और राखीने बौद्ध के बीच का तनाव नया नहीं है। पिछले साल इन दिनों वहां हिंसक घटनाओं ने जोड़ पकड़ा था। दुनिया भर में त्राहि मचाने वाले इस विवाद के बाद बोधगया में लोग भले ही दो मरे हों, पर अलसुबह नौ-दस विस्फोट हुए। बौद्ध और मुस्लिम संघर्ष का दाग भारतभूमि पर चिंतनीय है।

      रविवार को बोधगया में कई जगहों पर रखे टाइम-बाम को निष्क्रय भी किया गया। इनमें से कुछ प्रातः आठ और नौ बजे के बीच फटने थे। तो क्या यह कहना चाहिए कि एक बड़ा हादसा टल गया। बड़ी जानमाल की भयानक तबाही को प्रशासन ने रोककर बहादुरी का काम किया है। इस मामले में…

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