(Kaushal Kishore) The political scenario of Bihar is changing rapidly after the divorce of BJP and JD(U). Nitish has sent the second-largest party of the state to sit on opposition bench. Now they need to win the vote of trust in the state assembly on June 19 in order to remain in power. Meanwhile, the real game of political mathematics is still in progress. This is the time of maneuvering in the current situation of Indian democracy. JD(U) needs to touch the figure of 122 to remain in the government. They need to have four more legislators with them to achieve this target.

Nitish Kumar and Sushil Modi promised the citizen of the state that they will run the govt. together. Now their coalition no more exists. As thus, it is ethical that they should go to the people for next poll. But the courage for this is neither in Nitish nor in any other party of the state. None of the political parties are in favour of re-election in Bihar at this juncture. Moreover, the heavy cost of elections will be the next burden on the poor people of the state. As thus, the business to meet the figure of 122 will continue further.

Nitish Kumar and Sushil Modi both are versatile players of state politics. During the initial tenure of their govt. the two leaders played several new cards to trick the diversified classes of people of Bihar. Both of the leaders made enough of efforts to placate the extremely backward classes. They got its benefit in the last elections as well. Lalu and Ram Vilas went out of the periphery. Now a new race has begun with new techniques of maneuvering to get this class on their side. Sushil Modi began to say that the emerging star of the BJP is a representative of the extremely backward class so that they can be converted into their vote bank. Narendra Modi, the king Hindu hearts, turned into the ardent supporter of the extremely backward classes within a day.

There are many challenges before the largest party for the vote of trust. The total number of Congress legislators in Bihar is four. In addition to them there are half a dozen independent MLAs. One of them supports BJP, he has also planted several serious charges against JD(U). Congress may support the minority government from outside. On the other hand, there is a coalition between Congress and Lalu that can spell trouble. But the place where politics of the state rests anything can happen to fulfill the vested interests and to enjoy the power to rule. 

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बिहार की राजनीति का भूचाल

(कौशल किशोर) बिहार में भाजपा और जद(एकी) के तलाक के बाद की राजनैतिक परिदृष्य तेजी से बदल रहा है। नीतीश ने सत्तासीन रही दूसरी बड़ी पार्टी को विपक्ष में बैठने को भेज दिया है। अब उन्हें सत्ता में बने रहने के लिए 19 जून को विधानसभा में विश्वास मत हासिल करना होगा। इस बीच राजनीति की गणित का असली खेल होना शेष है। भारतीय लोकतंत्र के वर्तमान संस्करण में यह तोड़-जोड़ का वक्त होता है। जद(एकी) को सरकार में बने रहने के लिए 122 का आंकड़ा छूना होगा। इसके लिए उन्हें चार विधायकों की और जरुरत है।

   नीतीश कुमार और सुशील मोदी ने प्रदेश की जनता से साथ मिलकर सरकार चलाने का वादा किया था। अब उनका यह साथ छूट चुका है। नैतिकता के तकाजे पर इस हाल में उन्हें पुनः जनादेश लेना चाहिए। पर इतनी हिम्मत न तो नीतीश में है और न ही प्रदेश की किसी और पार्टी में ही। आज बिहार में फिर से चुनाव लड़ने के पक्ष में कोई भी पार्टी नहीं है। ऐसा करने से आखिरकार चुनाव का भारी खर्च प्रदेश की जनता के जेब पर ही पड़ता है। परिणामस्वरुप 122 का आंकड़ा पूरा करने के लिए व्यापार का सिलसिला जारी रहेगा।

   नीतीश और सुशील मोदी दोनों ही राज्य की राजनीति के मंजे हुए खिलाड़ी हैं। पिछली सरकार में दोनों नेताओं ने मिलकर विभिन्न वर्गों में बंटी बिहार की जनता को छलने के लिए कई नए पत्ते खेले। दोनों नेताओं ने मिलकर अतिपिछड़े वर्ग को रिझाने की जमकर कोशिश की थी। पिछले विधानसभा चुनाव में इसका फायदा भी उन्हें मिला। लालू और रामविलास जैसे नेता हासिये पर चले गए। अब इस वर्ग को अपने पक्ष में करने के लिए नए पैंतरेबाजी का नया दौड़ शुरु शुरु हो गया है। सुशील मोदी ने भाजपा के उदीयमान सितारे को अतिपिछड़े वर्ग का प्रतिनिधि बताकर इस वोट बैंक को भाजपा के पक्ष में करने की जुगत लगाई है। एक दिन में हिन्दु हृदय सम्राट को अतपिछड़े वर्ग का हितैषी बताकर नरेंद्र मोदी की नई सूरत गढ़ी जाने लगी है।

   विश्वास मत हासिल करने में जुटे सबसे बड़े दल के सामने कई चुनौतियां हैं। बिहार विधानसभा में कांग्रेस के कुल चार विधायक हैं। निर्दलीय विधायकों की संख्या छः है। जिनमें से एक ने भाजपा के प्रति अपना रुझान स्पष्ट कर जद(एकी) पर कई संगीन आरोप भी लगाए हैं। अल्पमत की सरकार को कांग्रेस बाहर से समर्थन दे सकती है। इस सूरत में नीतीश को सरकार में बने रहने के लिए किसी और की जरुरत नहीं होती है। दूसरी ओर कांग्रेस और लालू का अपना गठबंधन है, जो मुश्किलें खड़ी कर सकती है। परंतु प्रदेश की राजनीति जहां पहुंच गयी हैवहां स्वार्थपूर्ति और सत्तासुख के लिए कुछ भी हो सकता है।

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One thought on “Political Earthquake in Bihar

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