punarnav bharat

सम्राट चंद्रगुप्त अपने मंत्रियों के साथ एक विशेष मंत्रणा में व्यस्त थे कि प्रहरीने सूचित किया कि आचार्य चाणक्य राजभवन में पधार रहे हैं । सम्राट चकित रह गए । इस असमय में गुरू का आगमन ! वह घबरा भी गए । अभी वह कुछ सोचते ही कि लंबे – लंबे डग भरते चाणक्य ने सभा में प्रवेश किया ।
सम्राट चंद्रगुप्त सहित सभी सभासद सम्मान में उठ गए । सम्राट ने गुरूदेव को सिंहासन पर आसीन होने को कहा । आचार्य चाणक्य बोले – ” भावुक न बनो सम्राट , अभी तुम्हारे समक्ष तुम्हारा गुरू नहीं , तुम्हारे राज्य का एक याचकखड़ा है , मुझे कुछ याचना करनी है ।” चंद्रगुप्त की आँखें डबडबा आईं। बोले – ” आप आज्ञा दें , समस्त राजपाट आपके चरणों में डाल दूं ।” चाणक्य ने कहा – ” मैंने आपसे कहा भावना में न बहें , मेरी याचना सुनें । ” गुरूदेव…

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